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[Download 100%] – Cirkus Movie Review: जबरदस्ती हँसाने की कोशिश रही बेकार, ना कॉमेडी है, ना रोमांच! 2022 – Review Hindi

[Download 100%] – Cirkus Movie Review: जबरदस्ती हँसाने की कोशिश रही बेकार, ना कॉमेडी है, ना रोमांच! 2022 – Review Hindi

Cirkus Movie Review in Hindi: बॉलीवुड के फिल्म इंडस्ट्री की ब्लॉक बस्टर फिल्मों के डायरेक्टर रोहित शेट्टी की नई फिल्म सर्कस दर्शकों के बीच पहुँचने के लिए क्रिसमस के मौके पर धमाल मचाने रिलीज की गई जो की शायद उम्मीदों पर खरी नहीं उतार पाएगी।

Cirkus फिल्म का इंतजार दर्शक काफी बेसब्री से कर रहे थे क्योंकि इसमें रणवीर सिंह, पूजा हेगड़े और जैकलीन फर्नांडिस समेत कई मंझे हुए कॉमेडी कलाकार नजर आए हैं। रोहित शेट्टी की पूरी टीम ने सर्कस का प्रमोशन जोर-शोर से किया है की यह एक कॉमेडी फिल्म है, लेकिन शायद इस फिल्म में रोहित शेट्टी अपना वो वाला फ्लेवर नहीं दे पाए जिसके लिए वो जाने जाते हैं। चालिए जानते Cirkus Movie Review।

Cirkus Movie Review

Cirkus फिल्म की कहानी हमारे हिसाब से कुछ खास नहीं हैं जिसमे बताया जाता है की जन्म के समय हुई गड़बड़ियों के चलते जुड़वा बच्चे अलग हो जाते हैं लेकिन कुछ सालों बाद जब संयोग से वे बच्चे एक ही जगह आते हैं तो उनके जुड़वा रूप रंग के कारण जो संसय होता है उसी से इस फिल्म में कॉमेडी लाने का प्रयास किया गया है।

लेकिन ये कहानी सुनने में बड़ी अच्छी तो लग रही है लेकिन यह पहले भी आजमाई जा चुकी है, जी हाँ, 1982 में आई अंगूर फिल्म की कहानी कुछ ऐसी ही थी, जिसमें संजीव कुमार और देवेन वर्मा एक साथ पर्दे पर नजर आए थे।

ये कहानी भी शेक्सपियर के नाटक ‘द कॉमेडी ऑफ एरर्स‘ पर आधारित है, लेकिन अब 2022 में रोहित शेट्टी ने इसी कहानी को एक बार फिर से एक नए अंदाज लाने की कोशिश की है। उन्होंने इस कहानी को अपनी चर्चित फिल्म सीरीज गोलमाल फ्रैंचाइजी के साथ भी कनेक्ट करने का प्रयास किया है।

Cirkus Movie Review – कहानी

Cirkus फिल्म बॉलीवुड की एक फिल्म गोलमाल अगैन से भी इंसपायर्ड है जिसमें, जमनादास अनाथालय में चार जुड़वां बच्चे होते है, जब दो अलग-अलग परिवार उन्हें अपनाने आते हैं, तो डॉक्टर (मुरली शर्मा) अपने एक तर्क को साबित करने के लिए जुड़वा बच्चों की अदला-बदली करते हैं। वह दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि एक बच्चे के लिए उसका वंश नहीं, बल्कि उसका पालन-पोषण महत्वपूर्ण होता है।

दोनों परिवारों ने अपने बच्चों का नाम रॉय (रणवीर सिंह) और जॉय (वरुण शर्मा) रखा है। इस तरह एक जोड़ा बंगलौर में एक व्यापारी के घर पहुंचता है, जबकि दूसरा जोड़ा ऊटी में सर्कस के मालिक के पास पहुंचता है।

चारों शांति से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जब एक दिन, लगभग 30 वर्षों के बाद, बैंगलोर से रॉय और जॉय को किसी काम के लिए ऊटी आना पड़ता है। भ्रम यहीं से शुरू होता है, अब ऊटी शहर में दो रॉय और दो जॉय हैं कभी लोग एक से टकराते हैं तो कभी दूसरे से।

लोग जितने अधिक भ्रमित होते हैं, रॉय और जॉय दोनों ही उतने ही अधिक भ्रमित होते हैं। ऐसे में क्या होगा जब चारों आमने-सामने आ जाएंगे? क्या उन्हें अपनी अदला-बदली का सच पता चलेगा? कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।

Cirkus Movie Review – अभिनय

रणवीर सिंह एक बेहतरीन अभिनेता हैं जिन्होंने बैक टू बैक शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन एक्टिंग के मामले में सर्कस उनकी कमजोर फिल्मों में से एक है। ये फिल्म, ये कहानी रणवीर सिंह के टैलेंट के साथ न्याय नहीं कर पाती।

फिल्म का स्क्रीनप्ले इतना कमजोर है कि उनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। न पूजा हेगड़े के साथ उनकी जोड़ी अच्छी बनती है और न ही जैकलीन के साथ। रणवीर सिंह और वरुण शर्मा की केमिस्ट्री कहीं-कहीं ठीक भी है।

पूजा हेगड़े को अपनी स्क्रीन उपस्थिति पर बहुत ध्यान देना चाहिए। वहीं, जैकलीन का काफी कमजोर किरदार था। देखा जाए तो इस फिल्म के असली सितारे इसके सहायक कलाकार हैं।

संजय मिश्रा, सिद्धार्थ जाधव के कुछ महत्वपूर्ण दृश्य हैं जहाँ वे अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं । लेकिन रोहित शेट्टी ने इस बार मुरली शर्मा और जॉनी लिवर जैसे अभिनेताओं के किरदारों को बहुत कमजोर छोड़ दिया है।

Cirkus Movie Review – निर्देशन

कॉमेडी फिल्मों का निर्देशन हो या एक्शन फिल्मों का, रोहित शेट्टी का अपना एक स्टाइल है और वह इसमें सर्वश्रेष्ठ हैं। लेकिन आपको बता दें सर्कस उनकी अब तक की सबसे कमजोर फिल्म है। यूनुस सजवाल द्वारा लिखी गई पटकथा बहुत ढीली है, जिसके कारण दमदार स्टारकास्ट होने के बावजूद फिल्म हर लिहाज से औसत नजर आती है।

रोहित शेट्टी ने कभी रेट्रो सॉन्ग तो कभी गोलमाल ट्विस्ट के जरिए लोगों को थोड़ा नॉस्टैल्जिक बनाने की कोशिश की है। सेकंड हाफ में फिल्म थोड़ी बेहतर हो जाती है। लेकिन शुरुआत से ही कहानी इतनी सपाट हो जाती है कि आपके लिए फिल्म से बंधे रहना मुश्किल हो जाता है।

इतना ही नहीं, शायद ये पहली बार होगा जब रोहित शेट्टी ने अपने किरदारों के साथ भी न्याय नहीं किया है. सारे पात्र आधे-अधूरे लगते हैं। वहीं, सबसे बड़ा अफसोस क्लाइमेक्स को देखकर होता है.. जिस तरह से इस फिल्म में सर्कस के पूरे सेट अप को बर्बाद कर दिया गया है.. जो आपको “फिर हेरा फेरी” की याद दिलाता है जहां सर्कस सीक्वेंस को शानदार ढंग से शूट किया गया था।

Cirkus Movie Review – संगीत

फिल्म का संगीत देवी श्री प्रसाद, बादशाह और लिजो जॉर्ज-डीजे चेतस ने दिया है। फिल्म का अलबम बहुत कमजोर है। रणवीर-दीपिका पर फिल्माए गए गाने “करंट लगा रे” के अलावा कोई भी गाना आपके दिल और दिमाग तक नहीं पहुंचता है। फिल्म में तीन ही गाने हैं, लेकिन ये इतने औसत हैं कि फिल्म पर कोई असर नहीं छोड़ते।



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